मुझे यह सुनकर चिंता हो गई लेकिन मुझे सांस की तकलीफ़ नहीं थी। मैं 45 साल का स्वस्थ इंसान हूं और धूम्रपान भी नहीं करता। पहले करता था लेकिन कई साल पहले छोड़ चुका हूं। मुझे महसूस नहीं हो रहा था कि मैं कोरोना से संक्रमित हूं।
एक हफ़्ता और बीता तो अब मुझे खांसी भी आने लगी। गहरी सांस लेने पर लगता था कि जैसे मेरे फेफड़ों में आग लग गई हो। मेरे डाक्टर ने कहा कि यह निमोनिया हो सकता है। मैंने एंटी बायटिक लेना शुरू कर दिया। अब मैंने कोरोना का टेस्ट करवाने की कोशिश की लेकिन करवा नहीं पाया क्योंकि कहीं से कोई जवाब ही नहीं मिल रहा था।
एक हफ़्ता गुज़रा तो अब मेरे लिए चलना फिरना मुशकिल हो गया। मेरी पत्नी मुझे एक क्लिनिक में ले गई जहां मेरे सीने का एक्स रे लिया गया तो पता चला कि मुझे निमोनिया हो गया है। मैंने फिर कोरोना वायरस के टेस्ट की कोशिश की लेकिन भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि मुझे सफलता नहीं मिल पायी।
मैं बहुत बुरी हालत में घर लौटा। सीना जल रहा था। मैं कंबल ओढ़ कर लेट गया। डाक्टर के कहने पर मेरा फिर टेस्ट हुआ। इस बार एक्स रे और कोरोना का टेस्ट हुआ तो पता चला कि मेरा ब्लड आक्सीजन और वाइट सेल लेवल ठीक था। मुझे क्लिनिक वालों ने घर भेज दिया और कहा कि अगर हालत बिगड़ी तो तत्काल फिर आ जाना।
अगले दिन मेरा बुख़ार 103.5 डिग्री पर पहुंच गया। उस रात मुझे न्यूयार्क के राइनबेक में डचेज़ अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पहली रात और उसके बाद वाला दिन बहुत कठिन था। बार बार खून का सेंपल लिया जा रहा था। मुझे कभी बेहोशी आ जाती थी और कभी होश आता था।
दूसरे दिन मुझे पता चला कि कोरोना टेस्ट पाज़िटिव है और मेरे चेस्ट एक्स रे की रिपोर्ट भी काफ़ी ख़राब है। मेरे फेफड़ों पर बड़े बड़े धब्बे बन गए थे।
मुझे लग रहा था कि अब मैं डूब रहा हूं। मुझे अपनी 9 साल की बेटी की याद आ रही थी और मैं सोच रहा था कि उसे दोबारा देख पाउंगा या नहीं?
इसी बीच मैंने टीवी पर राष्ट्रपति ट्रम्प को यह कहते सुना कि वह लाक डाउन समाप्त करके जल्दी ही देश को फिर खोलने के बारे में सोच रहे हैं।
मैं यह पत्र हास्पिटल के बेड से लिख रहा हूं। मुझे हर क्षण अपनी पत्नी और बेटी की याद आ रही है। अस्पताल में डाक्टरों और नर्सों का रवैया काफ़ी हमदर्दी भरा है।
मुझे यह ख़याल आ रहा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प आम इंसानों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं क्योंकि वह कोरोना वायरस के ख़तरे की गंभीरता को बार बार नज़रअंदाज़ करने की कोशिश कर रहे हैं।
धीरे धीरे दवाओं ने अपना काम करना शुरू किया और मेरी हालत में सुधार आया। मेरा बुख़ार उतरा और सीने के एक्स रे की रिपोर्ट में भी बेहतरी नज़र आई। अब मेरी हालत में सुधार हुआ है और मेरी आशा बंधी है कि मैं अपनी बेटी को दोबारा देख सकूंगा। मैं ख़ुश किसमत हूं कि मैं डिसचार्ज होने जा रहा हूं।
यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य इमरजेंसी है और इस पर हमें पूरी गंभीरता से ध्यान देना होगा।
जेरेमी इगनर
न्यूयार्क टाइम्ज़ के जर्नलिस्ट